How to write and publish a ideal  book in (2024-2025) ?
How to write and publish a ideal book in (2024-2025) ?

How to write and publish a ideal book in (2024-2025) ?

अपनी पुस्तक को एक विश्वस्तरीय स्तर पर कैसे प्रकाशित करें ?
 
दोस्तों आज हम आपको बताने वाले हैं कि यदि आप एक लेखक हैं और अपनी पुस्तक को प्रकाशित कराने की योजना बना रहे हैं तो निश्चित ही यह लेख आपके लिए लाभदायक सिद्ध हो सकता है। तो आईए जानें कि कैसे आप एक विश्वस्तरीय पुस्तक का प्रकाशित मुफ्त में करा सकते हैं।
 
पुस्तक के शीर्षक का चुनाव:-
प्रत्येक पुस्तक एक अलग और अनूठे नाम से जानी जाती है और हर लेखक यह चाहता है कि उसकी पुस्तक एक अनूठे नाम से प्रकाशित हो। पुस्तक का शीर्षक एक शानदार और अनूठा होना चाहिए। पुस्तक का नाम आप स्वयं ही सोचकर रख सकते हैं अथवा अपने दोस्त, परिवारिक लोग अथवा आपके सहकर्मी हो सकते हैं।
यदि आपकी पुस्तक काव्य से सम्बन्धित है तब आप काव्य के अनुरूप पुस्तक का नाम दे सकते हैं। इसी प्रकार अन्य संदर्भों से भी आपकी पुस्तक का नाम आपके अनुसार हो सकता है।
पुस्तक किस बारे में है:-
अब आती है बारी कि आप जो पुस्तक लिखने की बात सोच रहे हैं वह आपके द्वारा पूर्व में सोचे गए शीर्षक से मेल खाती है अथवा नहीं। यदि आपकी सोच शीर्षक से मेल खाती है जिस पर आप पुस्तक लिखना चाह रहे हैं तो निश्चित रूप से आप पुस्तक लिख सकते हैं।
यदि आपकी पुस्तक काव्य के रूप में है तब आप अपने काव्य को विभिन्न प्रकारों में विभक्त कर उनका एक क्रम बना सकते हैं और उसे क्रमबद्ध रूप से सजाकर पुस्तक का आकार दे सकते हैं।
 
पुस्तक के साईज का निर्धारण:-
पुस्तक के साईज का निर्धारण नए लेखकों को चुनौती भरा हो सकता है। लेकिन इसमें कोई घबराने की बात नहीं है यह काम आप अपनी बुद्धिमता से कर सकते हैं। अगर आप स्वयं इस बारे में कोई निर्णय नहीं ले पा रहे हैं तब आप दूसरों से सलाह ले सकते हैं अथवा किसी प्रकाशक से मदद ले सकते हैं। यदि आप यह भी नहीं कर पा रहे हैं तब आप अपने नजदीक किसी पुस्तकालय में जाकर पुस्तक के साईज का पता कर सकते हैं और जो साईज आपको पसंद आ रहा है उसे आप लिखकर रख लिजिए और पुस्तक के प्रकाशन के समय आप अपने प्रकाशक को इस बारे में बता सकते हैं। 
वैसे काव्य संकलन अथवा अधिकतर साहित्य की पुस्तकें निम्न माप में प्रकाशित की जाती हैं।

(1)   5″X8″

(2)   5.5″X8″

(3)   5.5″X8.5″

यदि आपको आपके अनुरूप कोई साईज पसंद नहीं आ रहा है तब आप अपना साईज निर्धारण कर सकते हैं। ध्यान रहे कि उपरोक्त साईज से अन्य कोई बड़ा साइज आपके बजट को प्रभावित कर सकता है।
फायनल चैकिंग/पू्रफ रीडिंग:-
अब आपकी पुस्तक का लेखक कार्य हो गया है अब आती है बारी उसे फिर से से चैकिंग करने की कि कहीं कोई मात्रा, शब्द अथवा व्याकरण की कोई अशुद्धि तो नहीं हैं। फिर से चैक कीजिए शांत मन से, निश्चित तौर पर आपको आपकी लिखी गई पुस्तक में त्रुटियाँ मिल सकती हैं उन्हें सुधार की आवश्यकता है। सुधार कीजिए और फिर से प्रूफ रीडिंग कीजिए। हमारा मानना है कि यदि आवश्यक है तो औरों से भी चैक करा लिजिए।
 
पुस्तक के लिए आवश्यक सामग्री (शुभकामना संदेश इत्यादि):-
पुस्तक आपकी तैयार है, बस आपको अपनी पुस्तक को और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए सजावटी फूलों यानी की शुभकामना संदेश, बधाई इत्यादि की जरूरत होगी। इसके लिए आप अपने शुभचिंतकों, मित्रों, परिवारिक सदस्यों, अपने सहकर्मियों, रिस्तेदारों, गुरूजनों से चर्चा करें वह निश्चित ही आपको बेहतर से बेहतर बधाई संदेश आपकी पुस्तक की सफलता के लिए लिख भेजेंगे। एक जरूरी चीज तो छूट ही गई वह है ‘‘भूमिका’’ इसके लिए आप अपने किसी खास से जरूर चर्चा करें तो वह अपनी इस दुविधा का हल कर देगा। भूमिका लेखन के लिए उसे अपनी पूरी पुस्तक सौंपें तब ही वह संपूर्ण भूमिका लिख सकने में सक्षम होगा।
बाद में बारी आती है आपके द्वारा उपरोक्त व्यक्तियों के द्वारा लेख की गई साग्रमी इत्यादि का आभार प्रकट करने की तो लिख डालिए अपने शब्दों में ‘‘आभार’’।
स्वयं प्रकाशन अथवा पारंपरिक प्रकाशन:-
अब आती है बारी पुस्तक के प्रकाशन की, यह हर लेखक के लिए महत्वपूर्ण और चुनौती भरा समय होता है। यहीं पर लेखक काफी सोचता विचारता है कि उसकी पुस्तक का प्रकाशन कैसे होगा ? कितना खर्चा आएगा और कितने दिनों में प्रकाशित हो पाएगी ? 
दुविधा है कि किस प्रकाशक से प्रकाशित कराई जाए ? यदि आप नवोदित लेखक/लेखिका हैं तो यह चुनौती भरा हो सकता है। किसी ऐसे व्यक्ति से जानकारी अथवा मार्गदर्शन लिया जाए जिसने अपनी पुस्तक किसी प्रकाशक से कराई हो जो ईमानदारी से अपना काम करे। 
मन में आने वाले सवाल 
क्या सच में प्रकाशक पैसे लेकर चंपत हो जाएगा ?
क्या प्रकाशक से मिलकर ही सही होगा ?
क्या प्रकाशक को पहले रूपये देना उचित होगा याद बाद में ?
और ऐसे ही कई सवाल मन में आते हैं लेकिन फैसला आपको अपने अनुभव के आधार पर ही लेना होगा। 
यदि आप बिना कोई पैसे खर्च किए अपनी पुस्तक को प्रकाशित कराने की योजना बना रहे हैं तब आपको पारंपरिक प्रकाशक को खोजिए और आपके व प्रकाशक के मध्य हुए अनुबंध के आधार पर अपनी पुस्तक को प्रकाशित कराएं। याद रहे कि इस माध्यम से पुस्तक प्रकाशित कराने पर आपको रॉयल्टी न मिले अथवा बहुत ही कम मिले और पुस्तक प्रकाशन में काफी समय लग सकता है।
फिर इसके बाद आता है नंबर स्वयं प्रकाशन योजना का जो आजकल काफी प्रचलन में और अधिकतर प्रकाशन इस प्रकार की योजना आपके सामने पेश करते हैं। यदि आप तैयार है पुस्तक के प्रकाशन के लिए तो यह आपका समय बचाकर निर्धारत समय में आपकी पुस्तक प्रकाशित करवा सकते हैं। बस आपको इसमें कुछ पैसा खर्च करना होगा।
इस प्रकाशन में आने वाली कठिनाईयाँ:-
सबसे पहले लेखक सोचता है कि कहीं उसका पैसा फंस न जाए और प्रकाशन पैसे लेकर भाग जाए। आजकल यही देखने सुनने को मिल रहा है। इसके लिए आप स्वयं रिसर्च कर सकते हैं। इंटरनेट सोशल मीडिया का उपयोग कर आप प्रकाशन की सत्यता का पता कर सकते हैं यदि इससे आप सहमत नहीं हो पा रहे हैं तो आप प्रकाशन के कार्यालय पर जाकर व्यक्तिगत मिल रूप से सकते हैं। यदि आप प्रकाशक से संतुष्ट हैं तब आप अनुबंध के आधार पर अपनी पुस्तक प्रकाशित करा सकते हैं। 
पुस्तक प्रकाशित कराने से पूर्व ध्यान रखने वाली बातें –
1. पुस्तक का आकार, प्रकार व उसकी गुणवत्ता के बारे में पहले ही पुष्टि की जाए।
2. पुस्तक का प्रकार कैसा रहेगा पेपरबैक संस्करण अथवा हार्ड कवर संस्करण, आप अपने विवेक से सेट कर सकते हैं।
3. पेज संख्या का भी ध्यान रखा जाए अधिक पेज होेने पाठक पुस्तक को पढ़ने से बचते हैं क्योंकि अधिक पेज पढ़ने में समय लेते हैं। सुझाए गए पेज संख्या 100-150 तक काफी हैं।
4. पुस्तक कितनी प्रतियों में प्रकाशित होगी ? यदि आपको लगता है कि आपकी पुस्तक आमजन में लोकप्रिय है/होगी तब आपको अधिक से अधिक 100 प्रतियां ही छपवानी चाहिए उससे अधिक नहीं, क्योंकि लोग मात्र कहते ही हैं लेेकिन खरीदने से बचते हैं। यदि आप नवोदित लेखक/लेखिकों हैं तब आपको छोटा सा पैकेज लेकर संतुष्ट होना चाहिए। साथ ही यह भी ध्यान रखें कि बाजार मूल्य से अधिक रूपया किसी भी प्रकाशक को न दें और न ऐसे प्रलोभनों में फंसे जो आपके लिए अहितकारी हों।
5. रॉयल्टी के बारे में हर लेखक का जानना अधिकार है, रॉयल्टी के बारे में अपने प्रकाशक से बात करें और रॉयल्टी सेट करें साथ ही अधिक रॉयल्टी के चक्कर में न पड़ें। अधिकतम रॉयल्टी 50 प्रतिशत हो तो ठीक है। उससे अधिक रॉयल्टी कहीं न कहीं आपका लोभ बढ़ा सकता है।
6. पुस्तक के अधिकतम खुदरा मूल्य का निर्धारण लेखक का जन्म सिद्ध अधिकार है जो उसके अधिकार क्षेत्र में आता है। 
7. कॉपीराइट के बारे में भी प्रकाशक से बात करें और संतुष्ट होने पर ही प्रकाशन की प्रक्रिया को आगे जारी रखें।
8. सभी बातों से संतुष्ट होने पर ही पैसों का लेन देन करें और भुगतान की रसीद भी प्राप्त करें और प्रकाशक को यह भी जता दें कि समय पर काम होना चाहिए।
9. पुस्तक की बिक्री का लेखाजोखा लेखक के सामने होना चाहिए यदि प्रकाशन के पास कोई ऐसी ऑनलाईन व्यवस्था है जिसके माध्यम वह पुस्तकों की बिक्री के बारे में जानकारी मिलती रहे तो प्रकाशक लेखक को उपलब्ध कराए।
10. पुस्तकों की शिपिंग इत्यादि के खर्चे के बारे में पूर्व से पता कर लेना चाहिए।
11. लेखक और प्रकाशक के मध्य पारदर्शी तरीके से व्यवहार होना चाहिए क्योंकि पारदर्शी व्यवहार ही उनके मध्य प्रगाढ़ता को लंबे समय तक बनाए रहेगा।
 
यह रही आपकी पुस्तक प्रकाशित कराने की कुछ ध्यान रखने योग्य बातें। तो आप समझ ही गए हैं कि आपको पुस्तक को प्रकाशित कराने से पूर्व किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। 
यदि आपका इसके अतिरिक्त अन्य कोई प्रश्न है तो आप निश्चिंत होकर हमसे पूछें हम आपकी इस विषय में सहायता करके प्रसन्न होंगे।
 
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